Dard Shayari

ख़ामोश फ़ज़ा थी कहीं साया भी नहीं था, इस शहर में हमसा कोई तनहा भी नहीं था, किस जुर्म पे छीनी गयी मुझसे मेरी हँसी, मैंने किसी का दिल तो दुखाया भी नहीं था..

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ख़ामोश फ़ज़ा थी कहीं साया भी नहीं था,
इस शहर में हमसा कोई तनहा भी नहीं था,
किस जुर्म पे छीनी गयी मुझसे मेरी हँसी,
मैंने किसी का दिल तो दुखाया भी नहीं था..

तैरना तो आता था हमें मोहब्बत के समंदर में लेकिन, जब उसने हाथ ही नहीं पकड़ा तो डूब जाना अच्छा लगा..

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तैरना तो आता था हमें मोहब्बत के समंदर में लेकिन,
जब उसने हाथ ही नहीं पकड़ा तो डूब जाना अच्छा लगा..

1. दिया बनकर जिसने घर रोशन किया उसी ने घर जल दिया , धड़कन समझकर जिसे दिल में बसाया उसी ने दिल तोड़ दिया..

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1. दिया बनकर जिसने घर रोशन किया उसी ने घर जल दिया ,
धड़कन समझकर जिसे दिल में बसाया उसी ने दिल तोड़ दिया..

मंजिलें खामोश है ,शोर करता ये रास्ता तो है, दिल्लगी का हीं सही ,साथ कोई वास्ता तो है, कौन कहता है हमारे दरमियाँ कुछ भी नहीं, नामुक़्कमल इक अधूरी अनकही दास्ताँ तो है..

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मंजिलें खामोश है ,शोर करता ये रास्ता तो है,
दिल्लगी का हीं सही ,साथ कोई वास्ता तो है,
कौन कहता है हमारे दरमियाँ कुछ भी नहीं,
नामुक़्कमल इक अधूरी अनकही दास्ताँ तो है..

वो छोड़ के गए हमें, न जाने उनकी क्या मजबूरी थी, खुदा ने कहा इसमें उनका कोई कसूर नहीं, ये कहानी तो मैंने लिखी ही अधूरी थी..

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वो छोड़ के गए हमें,
न जाने उनकी क्या मजबूरी थी,
खुदा ने कहा इसमें उनका कोई कसूर नहीं,
ये कहानी तो मैंने लिखी ही अधूरी थी..

दो कदम तो सभी चल लेते हैं पर, ज़िन्दगी भर साथ कोई नहीं निभाता, अगर रो कर भुला सकते यादें, तो हँस कर कोई अपने गम न छुपाता..

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दो कदम तो सभी चल लेते हैं पर,
ज़िन्दगी भर साथ कोई नहीं निभाता,
अगर रो कर भुला सकते यादें,
तो हँस कर कोई अपने गम न छुपाता..