गुनाह करके सजा से डरते हैं, ज़हर पी के दवा से डरते हैं, दुश्मनों के सितम का खौफ नहीं हमें, हम तो दोस्तों के खफा होने से डरते है।


Dosti Shayari / Saturday, January 28th, 2017

गुनाह करके सजा से डरते हैं,
ज़हर पी के दवा से डरते हैं,
दुश्मनों के सितम का खौफ नहीं हमें,
हम तो दोस्तों के खफा होने से डरते है।

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