मुझ में खुश्बू बसी उस की है जैसे की ये जिंदगी उस की है वो कहीं आस पास है मौजूद हु-ब-हू हंसी उस की है खुद मैं दुखा रहा हूं दिल अपना इसमें लेकिन खुशी उस की है यानी कोई कमी नहीं है मुझ में यानी मुझ में कमी उस की है क्या मेरे ख्वाब भी मेरे नहीं क्या मेरी नींद भी उस की है|


Romantic Shayari / Wednesday, January 11th, 2017

मुझ में खुश्बू बसी उस की है
जैसे की ये जिंदगी उस की है
वो कहीं आस पास है मौजूद
हु-ब-हू हंसी उस की है
खुद मैं दुखा रहा हूं दिल अपना
इसमें लेकिन खुशी उस की है
यानी कोई कमी नहीं है मुझ में
यानी मुझ में कमी उस की है
क्या मेरे ख्वाब भी मेरे नहीं
क्या मेरी नींद भी उस की है|

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