“दोस्त साथ में हो तो रोने में भी शान है;दोस्त ना हो तो महफ़िल भी श्मशान है;सारा खेल दोस्ती का है;वरना जनाजा और बारात, एक समान हैं।”


Dosti Shayari / Friday, December 23rd, 2016

“दोस्त साथ में हो तो रोने में भी शान है;दोस्त ना हो तो महफ़िल भी श्मशान है;सारा खेल दोस्ती का है;वरना जनाजा और बारात, एक समान हैं।”

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