जिँदा है शाहजहाँ की चाहत अब तक, गवाह है मुमताज की उल्फत अब तक। जाके देखो ताज महल को ए दोस्तोँ, पत्थर से टपकती है मोहब्बत अब तक.


Love Shayari / Wednesday, March 8th, 2017

जिँदा है शाहजहाँ की चाहत अब तक,
गवाह है मुमताज की उल्फत अब तक।
जाके देखो ताज महल को ए दोस्तोँ,
पत्थर से टपकती है मोहब्बत अब तक.

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