ज़िंदगी है बड़ी नादान इसलिए चुप हूँ, दर्द ही दर्द सुबह शाम इसलिए चुप हूँ, कहो तो कह दूं ज़माने से दास्तान अपनी, उसमे आएगा तुम्हारा नाम इसलिए चुप हूँ..


Uncategorized / Wednesday, March 8th, 2017

ज़िंदगी है बड़ी नादान इसलिए चुप हूँ,
दर्द ही दर्द सुबह शाम इसलिए चुप हूँ,
कहो तो कह दूं ज़माने से दास्तान अपनी,
उसमे आएगा तुम्हारा नाम इसलिए चुप हूँ..

 

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