गुनाह करके सज़ा से डरते हैं, जहर पी के दवा से डरते हैं, दुश्मनों के सितम का खौफ नहीं, हम तो दोस्तों की वफ़ा से डरते हैं।


Dosti Shayari / Wednesday, March 8th, 2017

गुनाह करके सज़ा से डरते हैं,
जहर पी के दवा से डरते हैं,
दुश्मनों के सितम का खौफ नहीं,
हम तो दोस्तों की वफ़ा से डरते हैं।

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