आपके हुस्न कि तारीफ में सोचता हूँ कुछ अल्फाज लिखूं , लिखा ना हो जो अब तक किसी ने ऐसा कुछ आज लिखूं , गीत लिखूं या गजल लिखूं ,शायरी लिखूं या कलाम लिखूं , लिखने को बेचैन हूँ ,पर समझ ना आए क्या लिखूं..


Love Shayari / Wednesday, March 8th, 2017

आपके हुस्न कि तारीफ में सोचता हूँ कुछ अल्फाज लिखूं ,
लिखा ना हो जो अब तक किसी ने ऐसा कुछ आज लिखूं ,
गीत लिखूं या गजल लिखूं ,शायरी लिखूं या कलाम लिखूं ,
लिखने को बेचैन हूँ ,पर समझ ना आए क्या लिखूं..

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