आज मेरा दोस्त मुझसे रूठा है मेरे सब्र का बाँध भी अब टूटा है वो मुझे मिला ही कब था इस जमाने में जो मैं ये सोंचता हूँ की वो मुझसे छूटा है


Dosti Shayari / Wednesday, March 8th, 2017

आज मेरा दोस्त मुझसे रूठा है
मेरे सब्र का बाँध भी अब टूटा है
वो मुझे मिला ही कब था इस जमाने में
जो मैं ये सोंचता हूँ की वो मुझसे छूटा है

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