ऐसे तेरी कमी सी लगती है, आग जैसे हवा से सुलगती है, याद आते है लम्हे सब बीते हुए, जैसे जैसे यह शाम ढलती है..


Yaadein Shayari / Saturday, March 4th, 2017

ऐसे तेरी कमी सी लगती है,
आग जैसे हवा से सुलगती है,
याद आते है लम्हे सब बीते हुए,
जैसे जैसे यह शाम ढलती है..

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