आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की, लम्हें तो अपने आप मिल जाते हैं, कौन पूछता है पिंजरे में बंद परिंदों को, याद वही आते हैं जो उड़ जाते हैं।


Yaadein Shayari / Saturday, March 4th, 2017

आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की,
लम्हें तो अपने आप मिल जाते हैं,
कौन पूछता है पिंजरे में बंद परिंदों को,
याद वही आते हैं जो उड़ जाते हैं।

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