कभी आंसू तो कभी ख़ुशी देखी, हमने अक्सर मजबूरी और बेकसी देखी, उनकी नाराज़गी को हम क्या समझें, हमने तो खुद अपनी तकदीर की बेबसी देखी..


Zindagi Shayari / Wednesday, March 1st, 2017

कभी आंसू तो कभी ख़ुशी देखी,
हमने अक्सर मजबूरी और बेकसी देखी,
उनकी नाराज़गी को हम क्या समझें,
हमने तो खुद अपनी तकदीर की बेबसी देखी..

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