मंज़िल इन्सान के हौसले आजमाती है, सपनों के परदे आँखों से हटाती है, किसी भी बात से हिम्मत मत हारना, ठोकर ही इन्सान को चलना सिखाती हैं।


Zindagi Shayari / Tuesday, February 28th, 2017

मंज़िल इन्सान के हौसले आजमाती है,
सपनों के परदे आँखों से हटाती है,
किसी भी बात से हिम्मत मत हारना,
ठोकर ही इन्सान को चलना सिखाती हैं।

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