जीना चाहा तो जिंदगी से दूर थे हम मरना चाहा तो जीने को मजबूर थे हम सर झुका कर कबूल कर ली हर सजा बस कसूर इतना था कि बेकसूर थे हम।


Zindagi Shayari / Tuesday, February 28th, 2017

जीना चाहा तो जिंदगी से दूर थे हम
मरना चाहा तो जीने को मजबूर थे हम
सर झुका कर कबूल कर ली हर सजा
बस कसूर इतना था कि बेकसूर थे हम।

 

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