कभी आसूं तो कभी खुशी देखी.. हमने अक्सर मजबूरी और बेकसी देखी.. उनकी नाराजगी को हम क्या समझे.. हमने खुद कि तकदीर की बेबसी देखी…


Zindagi Shayari / Tuesday, February 28th, 2017

कभी आसूं तो कभी खुशी देखी..
हमने अक्सर मजबूरी और बेकसी देखी..
उनकी नाराजगी को हम क्या समझे..
हमने खुद कि तकदीर की बेबसी देखी…

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