आँखों से न ओझल थे, पहले अपने, अपने थे, एक घर में आज कई टुकड़े है, सब एक दूसरे से उखड़े है..


Zindagi Shayari / Thursday, February 23rd, 2017

आँखों से न ओझल थे,
पहले अपने, अपने थे,
एक घर में आज कई टुकड़े है,
सब एक दूसरे से उखड़े है..

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