रिमझिम तो है मगर सावन गायब है, बच्चे तो हैं मगर बचपन गायब है, क्या हो गयी है तासीर ज़माने की यारों, अपने तो हैं मगर अपनापन गायब है..


Zindagi Shayari / Tuesday, February 21st, 2017

रिमझिम तो है मगर सावन गायब है,
बच्चे तो हैं मगर बचपन गायब है,
क्या हो गयी है तासीर ज़माने की यारों,
अपने तो हैं मगर अपनापन गायब है..

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