खो गयी हूँ..इन रास्तो में कही, जहाँ से वापसी भी मुमकिन नही, ना कोई चेहरा अपना सा लगता है, ना कोई रास्ता पहचाना सा..


Zindagi Shayari / Tuesday, February 21st, 2017

खो गयी हूँ..इन रास्तो में कही,
जहाँ से वापसी भी मुमकिन नही,
ना कोई चेहरा अपना सा लगता है,
ना कोई रास्ता पहचाना सा..

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